खोदावन्दपुर केविके में कद्दू वर्गीय सब्जी उत्पादन तकनीक विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

खोदावंदपुर,बेगूसराय। कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर, बेगूसराय में कद्दू वर्गीय सब्जी उत्पादन तकनीक विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार को किया गया. इसके अलावे कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं एवं कृषि इनपुट डीलर्स के लिए डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट कोर्स के द्वितीय बैच का उद्घाटन भी किया गया, जिसमें 40 प्रशिक्षणार्थियों को अगले एक वर्ष तक संस्थान में तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ राम पाल ने बताया कि यह दोनों कार्यक्रम किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उनकी उत्पादकता बढ़ाने तथा आय में वृद्धि करने की दिशा में एक प्रयास है. उन्होंने बताया कि डी ए इ एस आई कोर्स मुख्य रूप से कृषि इनपुट डीलर्स के लिए डिजाइन किया गया है. यह उन्हें पैरा-एक्सटेंशन प्रोफेशनल के रूप में विकसित करता है, ताकि वे किसानों को वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय सलाह दे सकें. इस कोर्स में मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन, बीज उत्पादन, सिंचाई तकनीक, फसल प्रबंधन आदि विषय शामिल हैं. उन्होंने बताया कि तकनीकी सत्रों के लिए विशेषज्ञ अतिथियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्र खगड़िया के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ जितेंद्र कुमार तथा सब्जी उत्पादन तकनीक से डॉ रूपम रानी शामिल हुयी. इन विशेषज्ञों ने प्रशिक्षणार्थियों को उन्नत कृषि पद्धतियों, फसल प्रबंधन तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों जैसे कद्दू, लौकी, तोरी आदि की आधुनिक उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की. इस अवसर पर विशेष रूप से समेकित पोषण प्रबंधन तथा नेचुरल फॉर्मिंग पर जोर दिया गया. समेकित पोषण प्रबंधन में जैविक, अकार्बनिक एवं जैव उर्वरकों का संतुलित उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बनाये रखी जाती है, जबकि नेचुरल फॉर्मिंग प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित न्यूनतम बाहरी इनपुट वाली कृषि पद्धति है, जो मिट्टी स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत उत्पादन को बढ़ावा देती है. तीन दिवसीय प्रशिक्षण में कद्दू वर्गीय सब्जियों के लिए इन पद्धतियों का अनुप्रयोग, जैसे बीज उपचार, जीवामृत, मुल्चिंग एवं जैविक खाद का उपयोग पर चर्चा की गयी, जो बिहार की जलवायु एवं मिट्टी के लिए अत्यंत उपयुक्त सिद्ध हो रही हैं. डॉ राम पाल ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र खोदावंदपुर निरंतर किसानों के लिए ऐसी गतिविधियां आयोजित कर रहा है, जो तकनीकी ज्ञान के प्रसार से उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि सुनिश्चित करें. इस कोर्स पूरा करने वाले प्रशिक्षणार्थी किसानों के लिए विश्वसनीय स्रोत बनेंगे, जबकि तीन दिवसीय प्रशिक्षण से कद्दू वर्गीय सब्जियों की बेहतर पैदावार संभव होगी. समेकित पोषण प्रबंधन एवं नेचुरल फॉर्मिंग के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर सतत कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह संयुक्त आयोजन किसान कल्याण, ग्रामीण विकास एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहेंगे.