खोदावंदपुर,बेगूसराय। कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय द्वारा किये गये एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि जैगोपाल प्रजाति का केंचुआ आइसिनिया की तुलना में अधिक गुणवत्तापूर्ण वर्मीकम्पोस्ट तैयार करता है. इसकी जानकारी देते हुए केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रभारी डॉ रामपाल ने बताया कि जैगोपाल केंचुए की कार्यक्षमता कई दृष्टियों से बेहतर पाई गयी है. अध्ययन के अनुसार जैगोपाल केंचुए से वर्मीकम्पोस्ट तैयार होने में मात्र 45 से 50 दिन का समय लगता है, जबकि आइसिनिया प्रजाति में यह अवधि 50 से 60 दिन होती है. उत्पादन क्षमता के मामले में भी जैगोपाल आगे है- जहां 1 किलोग्राम जैगोपाल केंचुए से लगभग 60 से 70 किलोग्राम खाद (60 दिनों में) प्राप्त होती है, वहीं आइसिनिया से 50 से 60 किलोग्राम ही मिल पाती है. जैव अपघटन (बायोडिग्रेडेशन) की गति भी जैगोपाल में अधिक तेज पाई गई है, जिससे कार्बनिक अपशिष्ट तेजी से खाद में परिवर्तित होता है. पोषक तत्वों की दृष्टि से भी जैगोपाल वर्मीकम्पोस्ट अधिक समृद्ध है. इसमें नाइट्रोजन 1.5-1.8%, फॉस्फोरस 0.8-1.0% तथा पोटाश 1.2-1.5% पाया गया, जबकि आइसिनिया से बने वर्मीकम्पोस्ट में नाइट्रोजन 1.2-1.5%, फॉस्फोरस 0.6-0.8% एवं पोटाश 1.0-1.2% पाया गया. डॉ रामपाल ने बताया कि यदि किसान इस वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग रासायनिक उर्वरकों के साथ संतुलित मात्रा में करते हैं, तो फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है और मृदा स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर बना रहता है. कृषि विज्ञान केंद्र खोदावन्दपुर द्वारा किये गये इस शोध से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जैगोपाल केंचुआ किसानों के लिए अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है.