बिजली बिल बकाया पर नल-जल योजना का कनेक्शन कटा, पेयजल संकट गहराया

खोदावंदपुर/बेगूसराय। खोदावन्दपुर प्रखंड क्षेत्र में मुख्यमंत्री नल-जल योजना के तहत संचालित पानी टंकियों का बिजली कनेक्शन काटे जाने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गयी है, इससे क्षेत्र के हजारों लोग भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं और पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. मिली जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपये के बिजली बिल का भुगतान नहीं किए जाने के कारण विद्युत विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 29 मार्च को विभिन्न पंचायतों में स्थित पानी टंकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया, इससे सागी, दौलतपुर, बेगमपुर, तेतराही, खोदावंदपुर, मालपुर, बाड़ा, मसुराज एवं मिर्जापुर गांवों में जलापूर्ति पूरी तरह बाधित हो गयी है. इसकी जानकारी देते हुए विधुत विभाग के कनीय अभियंता पवन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री नल जल योजना के अंतर्गत सागी पंचायत में 16 लाख 86 हजार 341 रुपये, दौलतपुर गांव में 30 हजार 288 रुपये, बेगमपुर गांव में 18 लाख 11 हजार 717 रुपये, तेतराही गांव में 11 लाख 29 हजार 801 रुपये, खोदावन्दपुर में 9 लाख 49 हजार 751 रुपये, मालपुर गांव में 29 लाख 73 हजार 311 रुपये, बाड़ा गांव में 11 लाख 15 हजार 699 रुपये, मसुराज गांव में 16 लाख 78 हजार 780 रुपये एवं मिर्जापुर गांव में 8 लाख 55 हजार 64 रुपये बिजली बिल बकाया है. उन्होंने बताया कि विधुत प्रशाखा कार्यालय खोदावन्दपुर के अंतर्गत संचालित नल जल योजना का करीब डेढ़ करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया होने के कारण यह कार्रवाई की गई है. विद्युत विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि नल-जल योजना के तहत पानी आपूर्ति के लिए उपयोग की जा रही टंकियों का बिजली बिल पीएचईडी विभाग को भुगतान करना है, लेकिन लंबे समय से बकाया राशि जमा नहीं की गयी. वरीय अधिकारियों के निर्देश पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गयी है. वहीं दूसरी ओर इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है. माले नेता अवधेश कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रखंड क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत लोग नल-जल योजना पर निर्भर हैं, ऐसे में कनेक्शन काटे जाने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार और पीएचईडी विभाग से अविलंब बकाया बिजली बिल का भुगतान कर जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है. स्थानीय ग्रामीणों ने भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की आपूर्ति शुरू नहीं की गयी तो आंदोलन किया जायेगा. हलांकि प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है.