छौड़ाही के शाहपुर गांव में किसानों की बड़ी बैठक, लिये गये बड़े निर्णय* *हसनपुर चीनी मिल किसानों के साथ कर रही सौतेला व्यवहार: ईख काश्तकार संघ* *गन्ना बीज, सब्सिडी और मापी में गड़बड़ी को लेकर किसानों ने जताया आक्रोश* समस्याओं के समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी*

राजेश कुमार,खोदावन्दपुर/बेगूसराय। हसनपुर चीनी मिल प्रबंधन पर किसानों के साथ सौतेलापन व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए ईख काश्तकार संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक छौड़ाही प्रखंड क्षेत्र के शाहपुर पंचायत अंतर्गत वार्ड 3 स्थित प्रगतिशील किसान राजा अली के आवास पर आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता पूर्व मुखिया शिवचन्द्र यादव ने की. बैठक में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेते हुए चीनी मिल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए तथा किसानों के हक और अधिकारों की लड़ाई को संगठित रूप से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया. बैठक में उपस्थित किसानों ने आरोप लगाया कि हसनपुर चीनी मिल द्वारा लगातार किसानों की उपेक्षा की जा रही है. गन्ना बीज के नाम पर किसानों से खेती में गन्ना रोका गया, लेकिन आज तक किसानों को उसका भुगतान नहीं किया गया. किसानों ने कहा कि कई बार मिल प्रबंधन को इस संबंध में अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया. इससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
खाद-बीज सब्सिडी में भी गड़बड़ी का आरोप:-
बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि युरिया खाद उपलब्ध कराया जाय एवं बीज पर मिलने वाली सब्सिडी राशि भी केवल गिने-चुने किसानों को ही दी जाती है. अधिकांश किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता. किसानों ने आरोप लगाया कि अक्टूबर प्लांट के समय सभी किसानों को अनुदान देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में अधिकांश किसानों को किसी प्रकार का लाभ नहीं दिया गया. किसानों ने कहा कि यदि सरकार द्वारा किसानों के लिए बढ़ा हुआ मूल्य या अनुदान दिया जा रहा है तो उसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए, लेकिन मिल प्रबंधन पारदर्शिता नहीं बरत रहा है. इससे किसानों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है.
बोरिंग सब्सिडी में भी किसानों को ठगने का आरोप-
बैठक में किसानों ने बोरिंग पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया. किसानों ने कहा कि सिंचाई सुविधा को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन मिल से जुड़े किसानों को उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. कई किसानों ने आरोप लगाया कि आवेदन और प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें सब्सिडी नहीं दी गई. किसानों ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है. इससे छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है. किसानों को बोरिंग के साथ अब इलेक्ट्रिक मोटर सब्सिडी पर उपलब्ध कराने की मांग की गयी.
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी पक्षपात का आरोप:-
ईख काश्तकार संघ की बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेजने के नाम पर भी पक्षपात किया जा रहा है. किसानों ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक किसान पर लगभग 25 हजार रुपये तक खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके लिए कुछ निश्चित लोगों का ही चयन किया जाता है. बैठक में मांग उठाई गई कि किसानों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा सर्किल वाइज ईख काश्तकार संघ की अनुशंसा पर किसानों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए. किसानों ने कहा कि वास्तविक और मेहनतकश किसानों को प्रशिक्षण से वंचित रखना अन्याय है.
रकवा मापी में भारी गड़बड़ी का आरोप:-
बैठक में किसानों ने गन्ना क्षेत्र की मापी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. किसानों ने कहा कि मापी के बाद लगभग 20 प्रतिशत रकवा कम कर दिया जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. किसानों ने बताया कि जहां 22 कट्ठा में एक एकड़ की गणना होनी चाहिए. वहां 27 कट्ठा पर एक एकड़ मान लिया जाता है. इससे किसानों की जमीन और उत्पादन दोनों का गलत आकलन किया जाता है. किसानों ने इसे सीधा अन्याय बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की. किसानों ने कहा कि यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसान आंदोलन को बाध्य होंगे.
जागरूक होंगे किसान तभी सुनी जाएगी आवाज:-
बैठक की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मुखिया शिवचन्द्र यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक किसान जागरूक नहीं होंगे, तब तक उनकी आवाज प्रभावी ढंग से नहीं सुनी जाएगी. उन्होंने किसानों से संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आज वही किसान उपेक्षा और शोषण का शिकार हो रहे हैं. किसानों को अपने हक के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.
मिल कैंपस में संघ कार्यालय की मांग:-
बैठक में किसानों ने निर्णय लिया कि चीनी मिल कैंपस में ईख काश्तकार संघ के लिए एक कार्यालय कक्ष आवंटित कराया जाएगा, ताकि किसानों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए नियमित रूप से कार्य किया जा सके. किसानों ने कहा कि यदि संघ का कार्यालय मिल परिसर में होगा तो किसानों और प्रबंधन के बीच संवाद बेहतर होगा. इसके साथ ही गन्ना तोल में हो रही कथित गड़बड़ियों को ठीक कराने पर भी चर्चा की गई. किसानों ने आरोप लगाया कि गन्ना तौल के दौरान भी कई प्रकार की अनियमितताएं होती हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.
जीएम से मिलेगा किसानों का प्रतिनिधिमंडल:-
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल चीनी मिल के जीएम अशोक कुमार मित्तल से मिलकर किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखेगा. किसानों ने कहा कि यदि मिल प्रबंधन द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो अगली रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है. किसानों ने स्पष्ट कहा कि अब वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और किसी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे.
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद:-
बैठक में प्रगतिशील किसान रामनरेश यादव, राजकुमार आजाद, दिनेश चौधरी, सिकन्दर यादव, मुरली कुमार मिश्रा, रामचंद्र यादव, सदानंद यादव, नवीन कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे. सभी किसानों ने एक स्वर में मिल प्रबंधन से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की. बैठक का समापन किसानों की एकजुटता और अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ किया गया. किसानों ने कहा कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.