खोदावंदपुर केविके में पशु सखियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ समापन

खोदावंदपुर,बेगूसराय। पशु सखियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को किया गया. कृषि विज्ञान केंद्र खोदावन्दपुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रामपाल ने कहा कि लोग बकरी पालन कर एवं छोटे-छोटे स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं तथा पलायन मुक्त गांव बना सकते हैं. उन्होंने बकरी को गरीबों का एटीएम बताते हुए इसे बेहतर मुनाफा का साधन बताया. इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ विपिन ने बकरी पालन तथा पशुधन से संबंधित तथा रोजगार सृजन में बकरी पालन की संभावनाओं तथा पशुओं में होने वाले सामान्य रोगों, परजीवी रोगों, मौसम आधारित समस्याएं, टीकाकरण, कृमिनाशक संक्रमण काल में स्वास्थ्य प्रबंधन, पशुओं के बच्चों के देखभाल, फार्म की स्वच्छता प्रबंधन, प्रजनन प्रबंधन तथा पशु पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने पशुओं के लिए घरेलू चिकित्सा के बारे में भी पशु सखियों को विशेष रूप से बताया. इस प्रशिक्षण में प्रदान एवं जीविका से जुड़ी बेगूसराय के अलग-अलग प्रखंडों की 25 पशु सखियों को प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण में प्रदान तेघड़ा के लाइव स्टॉक विशेषज्ञ अवनीश ने बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन तथा घरेलू उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी. कार्यक्रम में प्रदान संस्था की सौम्याश्री ने कहा कि पशु सखी छोटे-छोटे रोग प्रबंधन करके या पशु से जुड़े कार्य को करके अपना जीविकोपार्जन कर सकती हैं. बताते चलें कि इससे पहले 2023 से दिसंबर 2025 तक 104 पशु सखियों को कृषि विज्ञान केंद्र खोदवंदपुर द्वारा स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इस कार्यक्रम से प्रशिक्षण लेकर बहुत सारी पशु सखियां पशु कार्यों को करके तथा घरेलू उपचार करके 5 से 6 हजार रुपया प्रति माह तक की आय अर्जित कर रही है. पशु सखियों के ट्रेनिंग के माध्यम से सुदूर गांव में भी पशु चिकित्सा को बढ़ावा दिया जा सकता है तथा पशु चिकित्सा में आने वाली खर्चे में कटौती भी की जा सकती है. इस प्रकार यह पशु सखी मॉडल एक आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में बेगूसराय जिले में उभरा है.