खोदावंदपुर/बेगूसराय। राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत गुरुवार को अखिल भारतीय संस्कृत हिन्दी विद्यापीठ खम्हार, बेगूसराय में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनायी गयी.आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ अशोक कुमार आजाद ने कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि आदि काव्य अर्थात् महाग्रंथ रामायण का रचना करके धर्म और सत्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किये. धार्मिक मान्यता के अनुसार पहले वाल्मीकि रत्नाकर नामक लूटपाट करने वाले डाकू थे, लेकिन सिद्ध संत के आशीर्वाद से धर्माचरण में प्रवृत्त हुये. वहीं बर्सर ओम प्रिय ने कहा कि क्रौंच पक्षी के करूण विलाप को सुनकर एक श्लोक निकला यथा मां निषाद प्रतिष्ठांत्वम् इत्यादि इसी के आधार पर 24 हजार श्लोकों से परिपूर्ण रामायण का रचना किये, जिसको चतुर्विंशति सहश्र संहिता भी कहा जाता है. इस मौके पर हिंदी के प्राध्यापक डॉ ललन कुमार ने कहा कि यह अमर ग्रंथ युगों-युगों तक विभिन्न संस्कृतियों सभ्यताओं को जीवन के हर क्षण और परिस्थितियों में प्रेरणा देता रहेगा. वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ विनय कुमार चौधरी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि धर्म साहित्य और संस्कार के महान स्तंभ हैं. उनकी कालजयी रचना रामायण से हमें धर्म और कर्म की राह पर चलने की प्रेरणा मिलती है. मौके पर कनीय लिपिक त्रिपुरारी झा, मीरा कुमारी, छात्र हर्ष कुमार, हरिओम कुमार, श्रीओम कुमार, कृष्ण कुमार समेत अन्य मौजूद थे. कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण से एवं समापन राष्ट्रगान से किया गया.