जयमंगलागढ़ मुसहरी को बुल्डोज कर दलितों के इतिहास को दफनाने की है साजिश: दिवाकर

राजेश कुमार,मंझौल/बेगूसराय। जयमंगलागढ़ मुसहरी टोला को अवैध अतिक्रमण बताकर उजाड़ने की प्रशासनिक फैसले के खिलाफ भाकपा (माले) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भाकपा माले जिला सचिव दिवाकर प्रसाद, खेग्रामस जिला सचिव चन्द्रदेव वर्मा, किसान महासभा के नेता व पूर्व मुखिया शैलेन्द्र सिंह, मुक्ति नारायण सिंह और संजय ठाकुर ने जयमंगलागढ़ मुसहरी टोला पहुंचकर वहां रह रहे दलित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान मुसहरी में बसे लोगों ने बताया कि यह टोला कोई नया या अवैध अतिक्रमण नहीं है, बल्कि पालवंश के काल से मंझौल-3 क्षेत्र में जयमंगलागढ़ मुसहरी अस्तित्व में है. आजादी के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी रामसेवक शर्मा द्वारा इसे कॉलोनी के रूप में विकसित कर मुसहर दलित परिवारों को बसाया गया था. लोगों ने कहा कि वर्षों से वे यहीं रह रहे हैं और उनकी कई पीढ़ियों का जीवन, संघर्ष और इतिहास इस मुसहरी से जुड़ा हुआ है. मुसहरी वासियों का आरोप है कि वर्तमान में मंझौल एसडीओ और प्रखंड विकास पदाधिकारी, चेरिया बरियारपुर द्वारा इसे लगातार “अवैध अतिक्रमण” बताया जा रहा है और पार्क निर्माण के नाम पर उजाड़ने की साजिश की जा रही है. इससे पूरा टोला दहशत में है. लोगों ने स्पष्ट कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है, क्योंकि यह बस्ती आजादी से पहले की है और पूर्णतः अधिकृत मुसहरी है. स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि यहां रहने वाले 40 से अधिक परिवारों को सरकार द्वारा विधिवत पर्चा दिया गया है. कई परिवारों को इंदिरा आवास योजना का लाभ भी मिल चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने स्वयं इस बस्ती को मान्यता दी है. इसके बावजूद यदि इसे अवैध बताकर उजाड़ने की कोशिश की जाती है, तो यह दलितों के संवैधानिक अधिकारों और उनके इतिहास पर सीधा हमला होगा. वहीं भाकपा माले जिला सचिव दिवाकर प्रसाद ने कहा कि जयमंगलागढ़ मुसहरी को बुल्डोज करना केवल घरों को तोड़ना नहीं, बल्कि दलित समाज के संघर्ष, पहचान और इतिहास को दफनाने की साजिश है. पार्टी इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी. खेग्रामस जिला सचिव चन्द्रदेव वर्मा और किसान महासभा के नेताओं ने भी प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि मुसहरी को उजाड़ने की कोशिश की गई तो व्यापक जन-आंदोलन खड़ा किया जायेगा. नेताओं ने प्रशासन से तत्काल इस मुसहरी को अवैध अतिक्रमण बताने की कार्रवाई को वापस लेने, दलित परिवारों को सुरक्षा की गारंटी देने और किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की योजना को रद्द करने की मांग की है.