राजेश कुमार,खोदावंदपुर/बेगूसराय। गन्ना की खेती किसानों के लिए घाटा का सौदा सावित हो रहा है. हसनपुर चीनी मिल प्रबंधन द्वारा पहले की तरह किसानों को सहयोग नहीं करना इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार गन्ना की खेती को नगदी फसल कहा जाता है. हसनपुर चीनी मिल प्रबंधन के अनुसार खोदावंदपुर के किसान गन्ना की खेती करते हैं, परन्तु चीनी मिल प्रबंधन की उदासीनता के कारण गन्ना की खेती करना किसानों के लिए मंहगा सावित हो रहा है.
क्या है समस्या:-
बताया जा रहा है कि लागत पूंजी के हिसाब से किसानों को गन्ना की खेती में आमदनी नहीं होती है. गन्ना उत्पादक किसानों ने बताया कि गन्ना कटनी के बाद तौल के समय गन्ना क्रेय केन्द्र किसानों से 315 रूपया कांटा पर लेता है और मिल गेट के समीप 335 रुपये लिया जाता है.इसके अलावे गन्ना क्रेय केन्द्र पर मजदूर गन्ना लोड करने की मजदूरी के रुप में किसानों से 6 रुपया प्रति क्विंटल के हिसाब से लेता है.किसानों का कहना है कि गन्ना की खेती में लागत मूल्य अधिक लगता है, जबकि उसके अनुरूप किसानों को गन्ना की कीमत नहीं मिल पाती है. अधिकांश किसानों के पास अपनी जमीन नहीं होती है. वह ठीका बटाई कर खेती करता है. मलगुजारी बढ़ जाने एवं खाद, बीज व जोताई का दर बढ़ जाने से किसानों को आर्थिक हानि होती है. चीनी मिल प्रबंधन ससमय किसानों को गन्ना कटाई की पूर्जी नहीं देते हैं, जिसके कारण किसानों का गन्ना खेत में ही रह जाता है.इसके अलावे गन्ना क्रेय केन्द्रों पर ससमय गाड़ी उपलब्ध नहीं होने से गन्ना ज्यादा दिन रह जाता है, जिससे उसका वजन घट जाता है. जो किसानों के लिए नुकसान दायक सावित होता है. किसानों ने बताया कि हसनपुर चीनी मिल प्रबंधन जनवरी एवं फरवरी महीने में गन्ना की कटाई के लिए पूर्जी कम उपलब्ध कराता है.तापमान अधिक होने के समय मार्च महीने में पूर्जी देता है तो खेतों से गन्ना कटाने में भी काफी परेशानी होती है.गन्ना कटवाने में मजदूरी भी ज्यादा देना पड़ता है.
पहले नहीं थी समस्या:-
गन्ना उत्पादक किसानों ने बताया कि
पूर्व के वर्षों में चीनी मिल प्रबंधन किसानों को उचित दाम पर खाद व बीज भी उपलब्ध करवाती थी, परंतु इस वर्ष गन्ना रोपाई में चीनी मिल प्रबंधन द्वारा किसानों को कोई सुविधा नहीं दी गयी है. किसानों का आरोप है कि गन्ना की खेती करनेवाले किसानों को चीनी मिल प्रबंधन समय पर पूर्जी नहीं देता है. मिल के जमादार अपने चहेते को पूर्जी दे देते हैं, और मिल के कलेण्डर का बहाना बना देते हैं, जिसके चलते बड़ें किसानों का गन्ना खेतों में ही लगा रह जाता है. गन्ना क्रय केन्द्र पर स्थानीय किसान जमादार की मिलीभगत से अपने गन्ना का वजन मनमाने तरीके से करवा लेता है. कमजोर किसान का गन्ना तौल होने में बाधा पहुंचाता है. जिसे चीनी मिल प्रबंधन के अधिकारी देखकर भी मूकदर्शक बने रहते हैं. किसानों की शिकायत है कि शिकायत करने के लिए जब फोन किया जाता है तो हसनपुर चीनी मिल के कोई भी अधिकारी फोन रिसीव करना उचित नहीं समझते हैं. गन्ना उत्पादक किसानों ने बताया कि चीनी मिल प्रबंधन किसानों से सीओ- 0238 किस्म की गन्ना लेने में ही रुचि दिखाती है. गन्ना के इस प्रभेद में विभिन्न किस्म के रोग लग जाते हैं. चीनी मिल प्रबंधन किसानों को गन्ना का दूसरा कोई प्रभेद उपलब्ध नहीं करवाती है. किसानों का कहना है कि चीनी मिल प्रबंधन द्वारा किसानों को गन्ना की खेती के लिए जागरूक भी नहीं किया जाता है, जिससे गन्ना उत्पादक किसानों में चीनी मिल प्रबंधन के प्रति नाराजगी देखी जाती है.
कहते हैं गन्ना उत्पादक किसान:-
गन्ना समय से कट नहीं पाता है, पूर्जी समय से उपलब्ध नहीं किया जाता है, सिंचाई की वजह से इस बार गन्ना कमजोर हो गया है.मिल के द्वारा खाद, बीज उपलब्ध नहीं करवाया जाता है, किसानों महंगे दर पर खेतों का पटवन करते हैं. जिसके कारण लागत के अनुसार आमदनी नहीं हो पाता है.
नवीन प्रसाद यादव, गन्ना उत्पादक किसान, बरियारपुर पश्चिमी
अनावृष्टि के कारण गन्ना की फसल बर्बाद हो गया, सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण फसल सुख गया.समय से पूर्जी नहीं मिलने के कारण गन्ना कटाई में किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है, इसमें हसनपुर चीनी मिल प्रबंधन को विशेष ध्यान देना चाहिये.
अजय कुमार सिंह, स्थानीय किसान, मटिहानी
हसनपुर सुगर मिल्स प्रबंधन को समय समय पर नये प्रभेदों के लिए किसानों को जागरूक करना चाहिये, जो नहीं किया जाता है, सिर्फ CO-0238 प्रभेद पर ही फोकस किया जाता है. गन्ना कटाने के लिए जो पूर्जी दिया जाता है, वह समय सीमा के अंतिम दिन, जिससे गन्ना कटाई नहीं हो पाता है, और पूर्जी की वैधता भी समाप्त हो जाती है, इसपर भी प्रबंधन को ध्यान देने की आवश्यकता है.
मोहम्मद एजाज अली, प्रगतिशील किसान, सिरसी
गन्ना की खेती में लागत मूल्य अधिक लगता है, जबकि उसके अनुरूप किसानों को गन्ना की कीमत नहीं मिल पाती है.अधिकांश किसानों के पास अपनी जमीन नहीं होती है.वह ठीका बटाई कर खेती करता है.मलगुजारी बढ़ जाने एवं खाद, बीज व जोताई का दर बढ़ जाने से किसानों को आर्थिक हानि होती है.
रामप्रीत यादव, गन्ना उत्पादक किसान, मेघौल
बोले क्षेत्रीय गन्ना निरीक्षक-
नये प्रभेदों के गन्ना के बारे में समय-समय पर किसानों को जागरूक किया जाता है.तथा किसानों के खेतों में लगें गन्ना फसल की मापी भी करवायी जाती है, जिससे जानकारी मिलती है कि किस क्षेत्र के कितने किसान कितने एकड़ में गन्ना की फसल लगाये हैं.मिल प्रबंधन किसानों के हर समस्या की समाधान करने के लिए तत्पर हैं और आगे भी रहेगें.
अनोज कुमार, क्षेत्रीय गन्ना निरीक्षक, हसनपुर चीनी मिल