खोदावंदपुर/बेगूसराय। कृषि विज्ञान केंद्र खोदावन्दपुर, बेगूसराय में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन एवं उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देना था. कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ राम पाल ने कहा कि असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता में लगातार गिरावट आती है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि संभव है. उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के साथ-साथ जिंक, बोरॉन एवं सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक है. इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और विभिन्न रोगों का खतरा भी कम होता है. इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ विपिन ने संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए किसानों को जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समन्वित उपयोग की जानकारी दी. कार्यक्रम में फसल प्रबंधन एवं मिट्टी की नियमित जांच पर विशेष जोर दिया गया. किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए कृषि वैज्ञानिकों से अपनी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त किया. अंत में किसानों से अपील की गई कि वे वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाएं और भूमि की उर्वरता को बनाए रखें.