Khodawandpur गंगा यमुना संस्कृति का अनोखा मिशाल है विवाह पंचमी स्थल तारा बरियारपुर, यहां संपन्न होता है मुहर्रम व विवाह पंचमी महोत्सव* *दूर दराज के साधु संतों ने श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव में करते हैं शिरकत*

राजेश कुमार/खोदावंदपुर(बेगूसराय) खोदावंदपुर प्रखंड क्षेत्र के बरियारपुर पश्चिमी पंचायत अंतर्गत एस एच 55 किनारे तारा बरियारपुर स्थित विवाह पंचमी स्थल पर हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के आस्था का केन्द्र है. यह स्थल एक साथ भारतीय गंगा यमुना संस्कृति का अनोखा मिशाल है. इस स्थल पर मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम में ताजिया जुलूस का आयोजन करते हैं. तो दुसरी ओर हिन्दू समुदाय के लोग उत्साह पूर्वक विवाह पंचमी महोत्सव मनाते हैं. मिथिलांचल का मशहूर त्योहार विवाह पंचमी 17 दिसम्बर को हो रहा है. इसको लेकर विवाह पंचमी स्थल को सजाने सवारने का काम अपने अंतिम पड़ाव पर है. विवाह पंचमी के अवसर पर गांव-गांव के श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ीयों से मर्यादा भगवान पुरुषोत्तम राम एवं जगत जननी मां सीता के विवाह का भव्य शोभायात्रा को लेकर श्रद्धालु तारा सर्कल चौक के समीप एकत्रित होते हैं, जो राम विवाह उत्सव के जनवासा के रूप में जाना जाता है. तारा सर्कल जनवासा से राम विवाह के लिए श्रद्धालुगण बराती और सराती के रूप में जनकपुर के प्रतीक स्वरूप विवाह पंचमी स्थल तारा बरियारपुर में भव्य विवाहोत्सव झांकी को लेकर गाजे-बाजे के साथ आतिशबाजी करते हुए पहुंचते हैं. वहां मौजूद महिलाओं द्वारा श्रद्धा पूर्वक बरातियों का द्वार का आगमन व रामलला के परछन के उपरांत मंगल गीतों के बीच वैदिक रीति रिवाज से राम और सीता का विवाहोत्सव संपन्न होता है. इसके अलावे बरियारपुर पश्चिमी, चलकी, बरियारपुर पूूर्वी, चकवा सहित अन्य ठाकुरबाड़ीयों के प्रांंगण में महाभोज का भी आयोजन किया जाता है. श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी के महंत राम खेलावन मेहता, बरियारपुर पूर्वी के महंत मधुसूदन शरण, गरीब दास, सुखराम शरण, रामचन्द्र दास, रामविलास शरण आदि बताते हैं कि विवाह पंचमी महोत्सव की तैयारी पूरी कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि हिन्दू, मुस्लिम दोनों ही सम्प्रदायों के अटुट आध्यात्मिक केन्द्र एवं गंगा यमुना संस्कृति के प्रतीक इस स्थल के सौंदर्यकरण एवं विकास की मांग सरकार से किया है.
बेटी की शादी के तरह होती है भगवान श्रीराम जानकी की विवाह-
बेटी की शादी के तरह हर कार्यक्रम भगवान श्रीराम व माता जानकी की विवाह की होती है. इस मौके पर दूर दराज के साधु संतों ने भगवान के विवाह महोत्सव के हर कार्यक्रमों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. साधु संतों ने बताया कि 16 दिसम्बर की शाम मटकोर एवं 17 दिसम्बर की रात गाजेबाजे के साथ बारात निकाली जायेगी तथा मिलन स्थल पर वर-वधू के स्वागत समारोह कर ठाकुरबाड़ी पर श्रीराम व जानकी की विवाह सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ की जाती है. तथा बीस दिसंबर को भगवान श्रीराम व जानकी की चौथा चौठारी संबंधित ठाकुरबाड़ीयों पर मनाया जायेगा. इस मौके पर मंदिर परिसर में महाप्रसाद का भी आयोजन किया जाता है. इस तरह श्रीराम एवं माता जानकी विवाह की धूम मची रहती है.
मेला स्थल की जमीन को अतिक्रमण कर लिये जाने से आयोजकों को हो रही परेशानी-
बरियारपुर पश्चिमी गांव स्थित दो समुदायों के धार्मिक स्थल को निजी स्वार्थ के लिये स्थानीय लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिये जाने से आयोजकों को मेला लगाने में काफी दिक्कतें होती रहती है. क्षेत्र के महंतों ने बताया कि मेला स्थल की जमीन गैर मजरूआ आम है. यहां हिन्दू धर्म के लोग श्रीराम जानकी विवाह महोत्सव एवं मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम मनाते हैं. मुहर्रम व विवाह पंचमी की मेला स्थल के जमीन को अतिक्रमण कर लिये जाने की लिखित शिकायत पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से कई बार की जा चुकी है, परंतु कोई भी पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझें. जिससे स्थानीय लोग अतिक्रमण हटाने के बजाय धीरे-धीरे अतिक्रमण करते ही जा रहे हैं. क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने अतिक्रमित मिलन स्थल की जमीन को अविलंब खाली कराने की मांग उच्चाधिकारियों से की है, ताकि दोनों समुदाय के लोगों को मेला लगाने में सहुलियत हो सकें.