खोदावंदपुर,बेगूसराय। प्रारंभिक खेती के बदले बहुस्तरीय खेती को किसान बढ़ावा दें, इससे न केवल जमीन का सही उपयोग होगा वरन उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी. किसानों को अपने उत्पाद का अधिक लाभ भी मिलेगा. यह बातें आदिशक्ति जीविका सीएलएफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदान संस्था से सुमन चौधरी ने कहीं. उन्होंने इमरसन साईट डेवलपमेंट, ग्राफ्टेड सीडलिंग उत्पादन, खेती से संबंधी उपाय आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की. साथ ही कहा कि बहुस्तरीय खेती करने से वातावरण में जलवायु से लड़ने का शक्ति मिलता है. वहीं जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार कर्ण ने उपस्थित किसानों को बहुस्तरीय खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बहुस्तरीय खेती से निम्न प्रकार के लाभ मिलते हैं, जैसे- जमीन का उचित उपयोग, बार-बार खेत जुताई से छुटकारा, दवाई एवं खाद का बचत, पानी की बचत, मजदूरी खर्च में कमी, कम लागत बेहतर आमदनी, जल्दी एवं लगातार आमदनी, मिट्टी की उर्वरता एवं मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होती है. मौके पर जीविका के ए सी चंदन कुमार, सी सी जगदीश कुमार, टी सी सौम्या श्री राय समेत अन्य ने बताया कि बिहार में 96 प्रतिशत लघु व सीमांत किसान हैं. लगातार बटवारा के कारण खेत का रकवा छोटा होता जा रहा है. मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है. कृषि कार्य में लागत अधिक और मुनाफा कम होती है. उन्होंने कहा कि फसल चक्र से खेती नहीं हो रही है. इन कारणों से किसान खेती में अधिक लाभ नहीं ले पाते हैं. वहीं जीविका के बी के कविता कुमारी, भीआरपी चंदा कुमारी समेत अन्य ने बताया है कि खेत में मचान बनाकर एक से कई फसल उगाया जा सकता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा. कार्यक्रम में दर्जनों किसान दीदीयां शामिल थी.