खोदावन्दपुर: फॉल आर्मीवर्म के प्रकोप से मक्के की फसलों का करें बचाव- वैज्ञानिक

खोदावंदपुर/बेगूसराय। फॉल आर्मीवर्म के प्रकोप से किसानों ससमय मक्के की फसलों का बचाव करें, नहीं तो रबी फसलों में काफी नुकसान पहुंच सकता है. इसकी जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र खोदावन्दपुर के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रामपाल ने गुरुवार को दी. उन्होंने कहा कि किसानों ने रबी मक्का की बुवाई लगभग पूरा कर चुके हैं. तथा रबी मक्का लगभग 25 से 30 दिन का हो चुका है. इस अवस्था में अनेकों कीट एवं बीमारी का प्रकोप हो सकता है. जिसमें फॉल आर्मीवर्म किट का प्रकोप बेगूसराय के मक्का लगाने वाले क्षेत्र में देखा जा रहा है. यह कीट बहुभाछी पॉलिफैगस प्रकृति के होने के कारण गन्ना, मक्का, धान, ज्वार कॉटन एवं सब्जी फसल सहित लगभग 80 प्रजाति के फसल में इसका प्रकोप देखा जाता है. इस किट के जीवन चक्र का चर्चा करें तो इस कीट का जीवन काल लगभग 14 दिन का होता है. इसके एक मादा व्यस्क कीट से अनुकूल परिस्थिति में एक बार में 100 से 300 अंडे दिये जा सकते हैं. पूरी जीवन काल में यह 1500 से 2000 अंडा देती है. यह कीट अंडा को पत्ती के अंदर पौधे के सतह के पास देती हैं. इससे निकलने वाले यंग कैटरपिलर 3 से 6 दिन का होने पर बढ़ने के क्रम में रात के समय पत्ती के अंदर से हिस्सों को हल्का हल्का खाना चालू कर देता है, जिससे पत्ती पर देखने में खिड़कीनुमा छेद दिखाई देने लगता है. इसके बाद इसके यंग कैटरपिलर धागानुमा आकृति के सहारे हवा द्वारा एक पौधे से दूसरे पौधे एवं एक अंग से दूसरे अंग में फैलती है. यही कैटरपिलर मक्के के गब्बा अथवा सेंटर में दो से तीन की संख्या में मिलकर नुकसान पहुंचाती है तथा बाद में फैल कर मक्के की बाली को भी नुकसान पहुंचाना चालू कर देती है, जिससे खेत में लगी फसल पूरी तरीके से नष्ट हो जाती है. वरीय वैज्ञानिक ने कहा कि इससे बचाव के लिए मक्के की बीज की बुवाई करने से पहले बीज को किसी कीटनाशक से उपचारित कर लें, जिससे शुरुआत के नुकसान से बचा जा सकता है. किसान भाई बुवाई के समय को परिवर्तित कर भी बचाव कर सकते हैं. चुकी ऑल आर्मीवर्म का प्रौढ़ अवस्था मिट्टी में 2 से 8 सेंटीमीटर अंदर में पाया जाता है. यही आगे चलकर अंडे देने में सक्षम होती है. इसके लिए समय रहते हुए फसल अवशेष प्रबंधन पर ध्यान दें तो इससे बचाव पाया जा सकता है. रासायनिक कीटनाशक में लैम्ब्डा कयहलोथरीन कीटनाशक दवा एक मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से बचाया जा सकता है अथवा इमा मेक्टिन बेंजोएट 1 ग्राम प्रति 3 लीटर पानी का घोल बनाकर स्प्रे कर इसका प्रबंधन कर सकते हैं.