खोदावंदपुर: सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका की पुत्र ने शिक्षा के क्षेत्र में किया कमाल, बीपीएससी की परीक्षा में मारी बाजी

खोदावंदपुर/बेगूसराय। दरिया के बांध बांधकर पानी को रोक दे और किसकी मजाल है, जो मेहनती और शैक्षणिक व्यक्ति को जीवन में कुछ भी हासिल करने से रोक दें. ऐसा ही कार्य परियोजना बालिका प्लस टू विद्यालय मेघौल की सेवानिवृत्त प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुधा कुमारी का पुत्र अमृतांशु रौशन ने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञान और प्रोद्योगिक विभाग में इंजीनियरिंग कॉलेज में यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में 51वॉ स्थान प्राप्त कर मेघौल और श्रीदुर्गा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की गर्व और गौरव में चार चॉद लगा दिया है. अमृतांशु रौशन की प्रारंभिक पढ़ाई मेघौल गांव में ही हुई थी. वह 15 वर्षों तक यहां की मिट्टी में पढ़ा और क्रिकेट खेल में भी कई बार टूनामेंट में कप जीतकर गांव का नाम रौशन किया था. वे बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं. अनुशासित जीवन, कठिन परिश्रम करना, लक्ष्य को पाने की सिख संतोष झा, बिनय कुमार और भवेश कुमार शर्मा जैसे गुरुजनों से मिली है, जो इनके सफलता के लिए उत्तरदायी भी हैं. बताते चले कि अमृतांशु रौशन मूल रुप से बेगूसराय जिला के शाम्हो गांव के रहनेवाले हैं. इनके बहन अमृता कुमारी भी प्लस टू विद्यालय में सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. अमृतांशु रौशन ने प्रथम प्रयास रेलवे में इंजीनियरिंग विभाग में नौकरी प्राप्त की और सेंट्रल मुंबई डिवीजन में कुछ महीने कार्य भी किया, परंतु शिक्षण कार्य में विशेष रूचि होने के कारण रेलवे की नौकरी छोड़कर वर्ष 2017 में बच्चों को पढ़ाने लगे. इसी क्रम में वर्ष 2018 में बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में व्याख्याता के पद पर पॉलिटेक्निक कॉलेज में चयनित होकर बिहार के सबसे अच्छे पॉलिटेक्निक कॉलेज नवीन राजकीय पॉलिटेक्निक पटना -13 में पदस्थापित हुए. शिक्षण कार्य में रुचि होने की वजह से बहुत ही कम समय में छात्र-छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गए. आज इनके कुशल निर्देशन से बिहार के सैकड़ों गरीब बच्चे अच्छी तकनीकी शिक्षा पाकर भारत के प्रतिष्ठित संस्थान जैसे- इसरो, डीआरडीओ, भाभा परमाणु अनुसंथान केंद्र, एनटीपीसी, रिफाइनरी आदि संस्थानों में नौकरी प्राप्त कर राष्ट्र सेवा में अग्रसर हैं. इनकी पढ़ाने की शैली बेहद अलग और उत्प्रेरक है, जो छात्रों को अपनी ओर खींच लेता है. शायद यही कारण रहा है कि बीपीएससी के साक्षात्कार में 15 में सबसे अधिक 14 अंक प्राप्त हुआ है. इतना ही नहीं अमृतांशु रौशन ने आईआईटी आईएसएम धनबाद से एमटेक करने के बाद वर्तमान में एनआईटी पटना से मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी कर रहे हैं. सेवाकाल में इन्हें काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा, परंतु अपने शांत चित्त, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा एवं बुलंद हौसलों से सारी बाधाओं को पार करते हुए सफलता की ओर अग्रसर हैं और वर्तमान में गवर्मेंट पॉलिटेक्निक शेखपुरा में व्याख्याता के पद पर कार्य करते हुए अपनी सफलता से छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाया है. इनके जीवन से सभी छात्र छात्राओं को यह संदेश है कि अगर बुलंद हौसलों के साथ और सच्ची इमानदारी से निरंतर प्रयास किया जाए तो किसी भी लक्ष्य को आसानी से पाया जा सकता है. अपनी सफलता का श्रेय माँ भगवती के अलावे अपने माता पिता, सभी गुरुजनों, शुभचिंतकों और अपने छात्रों को दिया है.