खोदावंदपुर: सड़क जाम करने के आरोप में 11 नामजद समेत पचास अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज

खोदावंदपुर/बेगूसराय। गत 7 अक्टूबर को उत्पाद विभाग बेगूसराय की विशेष छापामारी टीम द्वारा खोदावंदपुर थाना क्षेत्र के मेघौल पंचायत के वार्ड चौदह निवासी गरीब चौधरी के घर से उसके निर्दोष पुत्र श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर लिया था.अपने निर्दोष बेटे के गिरफ्तारी एवं उत्पाद विभाग के पदाधिकारी कर्मियों द्वारा बेवजह गरीबों को परेशान करने के विरोध में श्रवण कुमार के परिजन एवं ग्रामीणों ने सात अक्टूबर को मेघौल पेठिया के समीप बेगूसराय- रोसड़ा मुख्य पथ एस एच 55 को जाम कर दिया था. सड़क जाम के कारण उक्त पथ पर घंटों यातायात बाधित रहा था. सूचना मिलने पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद गिरफ्तार श्रवण को उत्पाद विभाग के पदाधिकारियों के चंगुल से मुक्त कराने का आश्वासन देकर सड़क जाम समाप्त करवाया था. सड़क जाम कर रहे आंदोलनकारियों ने पुलिस के कहने पर रोड जाम तो समाप्त कर दिया, लेकिन खोदावंदपुर पुलिस ने अपना वादा पूरा नहीं किया. गिरफ्तार श्रवण कुमार को रिहा करने के बदले उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में बेगूसराय भेज दिया. जो माननीय न्यायालय के आदेश से बेल पर जेल से बाहर निकला है. इधर खोदावंदपुर पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है, स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार श्रवण को रिहा तो नहीं करवाया, उल्टे सड़क जाम करने वाले आंदोलनकारी मेघौल पेठिया निवासी शंकर चौधरी, शिवजी चौधरी, मिट्ठू चौधरी, मोहन चौधरी, जितेन्द्र चौधरी, गुड्डू चौधरी, अजीत चौधरी, रामचन्द्र चौधरी, गरीब चौधरी, सरदार चौधरी, राजू चौधरी को नामजद समेत पचास अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया है. इसकी जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष सुदीन राम ने बताया कि नामजद उपद्रवियों के विरुद्ध थाना कांड संख्या- 244/022 दर्ज कर पुलिस मामले की गहन जांच पड़ताल करने में जुटी है.
वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारियों के विरूद्ध स्थानीय पुलिस द्वारा मामला दर्ज किये जाने को लेकर ग्रामीणों ने इसे अफसरशाही बताया. पासी समाज के लोगों ने बताया कि वे लोग महादलित और गरीब समाज से हैं. परमपरागत रोजगार करके किसी तरह दो जून का रोटी जुटा पाते हैं. खोदावंदपुर पुलिस और बेगूसराय उत्पाद विभाग की पुलिस बेवजह वे गरीब लोगों को प्रताड़ित करती है. अक्सर छापामारी कर परेशान करते हैं, जिससे उनका रोजगार एवं आबरू खतरे में है. निर्दोष लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया जाता है. इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इन लोगों ने वरीय अधिकारियों एवं बिहार सरकार से पुलिस की निरंकुशता पर रोक लगाने तथा निर्दोष अभियुक्तों को इस मुकदमा से बड़ी करने का अनुरोध किया है.