खोदावंदपुर, बेगूसराय। मातृ दिवस के अवसर पर सोमवार को खोदावंदपुर प्रखंड मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम भावनाओं से सराबोर हो गया, जब प्रखंड विकास पदाधिकारी मिथिलेश बिहारी वर्मा ने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से मां के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया. बीडीओ ने कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जन्नत का एहसास है. उन्होंने अपनी कविता में मां के त्याग, ममता, संघर्ष और निस्वार्थ प्रेम को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया. कविता की पंक्तियां सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग भावुक हो उठे.
उन्होंने कहा-
“मां को क्या कहें, वो तो जन्नत का एहसास है,
हमारी हर छोटी-बड़ी खुशी में उसकी अरदास है.”
कविता में उन्होंने बताया कि मां अपने बच्चों की खुशियों के लिए हर त्याग करने को तैयार रहती है. खुद की जरूरतों को भूलकर वह बच्चों की हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने में लगी रहती है. बीडीओ ने मां के वात्सल्य का चित्रण करते हुए कहा कि आंखें कमजोर होने के बावजूद मां हमेशा अपने बच्चों की चिंता करती रहती है. खुद पुराने कपड़ों में रहकर भी बच्चों के लिए किसी चीज की कमी नहीं होने देती.
उन्होंने कहा-
“पता नहीं किस धातु की बनी है मेरी मां,
पता नहीं किन दुआओं से सजी है मेरी मां.”
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य लोगों ने बीडीओ की इस भावनात्मक कविता की जमकर सराहना की. मातृ दिवस के अवसर पर प्रस्तुत इस कविता ने सभी को अपनी मां की ममता और त्याग की याद दिला दी.