राजेश कुमार,खोदावंदपुर/बेगूसराय। छौड़ाही थाना क्षेत्र के सांवत गांव में रविवार की देर शाम हुई हिंसक झड़प और मारपीट के मामले में छौड़ाही पुलिस ने एफआईआर में आरोपी बनाये गये मुख्य मुदालय को सोमवार की दोपहर थाने से ही मुक्त कर जिले के वरीय पदाधिकारी के आँखों में धूल झोकने का बड़ा साहसिक काम कर दिया। छौड़ाही थानाध्यक्ष ने वरीय पदाधिकारियों के आँख में ऐसा धूल झोका कि आप जानेगें ना सिर्फ घोर आश्चर्य होगा, बल्कि पुलिस की कार्यशैली से भरोसा ही उठ जायेगा।
दर असल हुआ यूं कि हिंसक झड़प और जबरदस्त मारपीट के मामले में सांवत गाँव निवासी मोहम्मद अब्दुल अहद उर्फ भोला की पत्नी नईमा खातुन के लिखित बयान पर एफआईआर दर्ज की गयी। दर्ज एफआईआर थाना कांड संख्या- 180/2025 में पीड़िता ने पूर्व पंसस सांवत निवासी मोहम्मद अख्तर इमाम उर्फ छोटु को मुख्य अभियुक्त बनाया गया। इसके अलावा आधे दर्जन से अधिक लोग नामजद अभियुक्त बनाये गये हैं। छौड़ाही थानाध्यक्ष के निर्देश पर पुलिस ने मुख्य अभियुक्त अख्तर इमाम उर्फ छोटु को रविवार की शाम में ही हिरासत में लिया। पूर्व पंसस को थाने से ही मुक्त कराने के लिये स्थानीय सफेदपोश थाने और थानाध्यक्ष का चक्कर काटने लगे।
आखिरकार थानाध्यक्ष ने सोमवार की दोपहर एफआईआर में नामजद अभियुक्त मोहम्मद अख्तर इमाम को थानाध्यक्ष ने थाना से ही मुक्त कर दिया और बेगूसराय एसपी को छौड़ाही थाना कांड संख्या- 180/2025 में गिरफ्तार किये जाने की विधिवत सूचना दे दी। थानाध्यक्ष द्वारा भेजे गये सूचना के आधार पर बेगूसराय जिला पुलिस ने जिले भर में सोमवार को गिरफ्तार किये गये जिले के विभिन्न थाने की लंबी लिस्ट जारी की, जिस लिस्ट के 13वें नंबर पर छौड़ाही थाना के कांड संख्या- 180/2025 को के आरोपी मोहम्मद अख्तर इमाम को गिरफ्तार किये जाने की जानकारी सार्वजनिक की गयी है, लेकिन थानाध्यक्ष ने हिरासत में लिये गये मोहम्मद अख्तर इमाम को थाने से ही छोड़ दिया। क्षेत्र में चर्चा है कि छौड़ाही थानाध्यक्ष मोटी रकम लेकर स्थानीय सफेदपोश के दबाब में संगीन धाराओं में दर्ज एफआईआर के आरोपी को थाना से ही छोड़ दिया गया। मामले में दोनों ओर से एफआईआर दर्ज है। छौड़ाही थानाध्यक्ष के इस कार्य ने वरीय पुलिस पदाधिकारियों को एक तरह से गुमराह कर बेगूसराय पुलिस की छवि को सवालों के घेरे लाकर खड़ा कर दिया है। अब देखने वाली दिलचस्प बात यह होगी कि बेगूसराय जिले के पुलिस कप्तान ऐसे लापरवाह थानाध्यक्ष पर किस तरह की कार्रवाई करते हैं।