राजेश कुमार,खोदावंदपुर/बेगूसराय। छौड़ाही प्रखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. प्रखंड के जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अनुमंडल पदाधिकारी मंझौल को आवेदन सौंपते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोपों में विकास कार्यों में लापरवाही, पूर्व में किये गये कार्यों भुगतान में अनावश्यक विलंब, अभद्र व्यवहार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग तक की बातें शामिल है. इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. पंचायतों में विकास योजनाएं ठप है. योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं किया जा रहा है. लिहाजा जनप्रतिनिधियों और आमलोगों में बीडीओ के विरुद्ध काफी आक्रोश है.
जनता और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं-
प्रखंड प्रमुख मनोज कुमार ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा छौड़ाही प्रखंड में विकास कार्य पूरी तरह ठप है. जनप्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी की जा रही है. यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो हम सभी जनप्रतिनिधि आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. उन्होंने साफ कहा कि यह केवल जनप्रतिनिधियों का नहीं, बल्कि पूरे प्रखंड की जनता का मुद्दा है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रमुख ने कहा कि इस पूरे मामले से वरीय अधिकारियों को पूर्व में भी अवगत कराया गया है. वहीं ऐजनी पंचायत के उपमुखिया राम शंकर साहु ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रखंड कार्यालय में आम जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार उपेक्षा हो रही है. लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती. यह रवैया कहीं ना कहीं विकास कार्यों को प्रभावित करने का प्रत्यक्ष प्रमाण है.
मुखिया संघ के अध्यक्ष रामसेवक पासवान के साथ अमर्यादित व्यवहार का मामला फिर गरमाया-
दिये गये आवेदन में सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष सह सहुरी पंचायत के मुखिया रामसेवक पासवान के साथ बीडीओ द्वारा पूर्व में किये गये अमर्यादित व्यवहार का मामला भी फिर से चर्चा में आ गया है. जानकारी के अनुसार मुखिया रामसेवक पासवान ने पहले ही बीडीओ छौड़ाही के खिलाफ अभद्र व्यवहार और अपमानजनक भाषा के उपयोग को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जनप्रतिनिधियों में रोष और बढ़ गया है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब एक मुखिया संघ के अध्यक्ष के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम जनप्रतिनिधियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
कार्यालय से गायब रहते हैं बीडीओ, रोसड़ा में बना रखा है ठिकाना-
दिये गये आवेदन में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया गया है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी छौड़ाही मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते हैं. उनका निवास छौड़ाही प्रखंड कार्यालय से सीमावर्ती जिला समस्तीपुर के रोसड़ा क्षेत्र में बताया गया है, जो छौड़ाही मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर है. इस वजह से आम जनता और जनप्रतिनिधियों को उनसे मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कई बार लोग घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन अधिकारी उपलब्ध नहीं होते.
विकास योजनाएं ठप है.
पूर्व के विकास कार्यों का भुगतान में टालमटोल करना बीडीओ की नियति में खोठ-
जनप्रतिनिधियों ने आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रखंड में विकास योजनाओं की स्थिति बेहद खराब है. नई योजनाएं शुरू नहीं हो रही हैं. पुराने कार्यों का भुगतान लंबित है. पंचायतों में उपलब्ध राशि के बावजूद काम नहीं हो रहा है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए है और जनता में भारी आक्रोश है.
सीसीटीवी खराब होने के बहाने बंद सरकारी गाड़ी का निजी उपयोग पर लगाया गंभीर आरोप, अभद्र व्यवहार और धमकी से जनप्रतिनिधियों में बीडीओ के खिलाफ आक्रोश-
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रखंड कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों को खराब बताकर बंद कर दिया गया है, ताकि पारदर्शिता खत्म हो सके. साथ ही सरकारी वाहन का उपयोग निजी कार्यों में किए जाने की बात भी कही गई है. जनप्रतिनिधियों ने बीडीओ के मोबाइल लोकेशन की जांच कराने की मांग की है, जिससे उनकी वास्तविक उपस्थिति का खुलासा हो सके.इसके अलावा जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि बीडीओ द्वारा उनसे अभद्र व्यवहार किया जाता है और इतना ही नहीं कई बार तो बीडीओ सीमाएं लांघ यहाँ तक कह देते कि सरकारी कार्य में बाधा डालने के नाम पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जायेगा. बीडीओ के इस तरह के रवैये से जनप्रतिनिधियों में भय और असंतोष और भारी आक्रोश का माहौल है.
उच्चाधिकारियों और मंत्री तक पहुंचा मामला-
इस मामले को गंभीरता से देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने कई उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी आवेदन भेजी है, जिनमें मंत्री बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त, जिला पदाधिकारी बेगूसराय मुख्य है. इससे साफ है कि जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने के लिए तैयार हैं और अविलंब बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये उच्चाधिकारियों से जोरदार मांग की है.
स्थानांतरण की मांग, नहीं तो तालाबंदी और धरना तय-
जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बीडीओ छौड़ाही के मामले की त्वरित जांच कर स्थानांतरण नहीं किया गया, तो वे प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी करेंगे. उनका कहना है कि अब यह लड़ाई केवल सम्मान की नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की है.
कई जनप्रतिनिधियों ने किया समर्थन, मामला बना जनआंदोलन-
इस आवेदन पर प्रखंड प्रमुख मनोज कुमार के साथ जिला पार्षद क्षेत्र संख्या- 07 की सदस्य पुष्पा कुमारी, सहुरी पंचायत की सरपंच चाँदनी देवी, अमारी मुखिया प्रिया कुमारी, ऐजनी पंचायत के मुखिया पंकज दास, सरपंच मो.अजमत अली, परोड़ा सरपंच सीताराम यादव, पंसस सकीना देवी, छठिया देवी, विभा देवी समेत दर्जनों जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, पैक्स अध्यक्ष और अन्य प्रतिनिधि शामिल हैं. यह मामला अब व्यक्तिगत शिकायत से निकलकर सामूहिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. छौड़ाही प्रखंड से उठी यह आवाज अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है. लगातार बढ़ते आरोप और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि स्थिति गंभीर है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है. फिलहाल इतना तय है कि छौड़ाही की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा रूप ले सकता है.